अमेरिकन बहु – bedtime stories | kahani | fairy tales | moral stories | story time | hindi stories

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अरे जीते रहो और बताओ सफर कैसा रहा सफर तो बहुत अच्छा था मैं अच्छा ठीक है अब तुम दोनों अपने कमरे में जाकर आराम कर लो काफी थक गए होंगे मैं तुम्हारे लिए कुछ चाय नाश्ते का इंतजाम करती हूं कमरे में पहुंचने के बाद चांदनी अपने पति रमेश से कहती है अरे बाप रे यहां तो कितनी गर्मी है सच में पता नहीं इंडिया के लोग कैसे रहते हैं

अरे अरे तुम चिंता मत करो कुछ दिनों में यहां रहने की आदत पड़ जाएगी अगले दिन सुबह सुबह से मां अपने बहुत चांदनी से कहती है अरे बहू मैं और तेरे बाबूजी तेरे हाथ का बना नाश्ता करेंगे जा फटाफट रसोई घर में जाकर कुछ बढ़िया सा बना कर ले तभी चांदनी मुंह बनाते हुए कहती है है रे माझी अपने घर में कोई नौकर नहीं है क्या काम करने के लिए यह सुनकर शीला मुस्कुराती हो भाषा पीछे करें कर देती है हारे बहू इतना छोटा सा तो परिवार हमारा भला हमें नौकर की जरूरत क्या है अब अब क्या बताऊं मैं जी मुझे खाना बनाने की आदत नहीं है अमेरिका में तो हम ज्यादातर खाना रेस्टोरेंट से ही मंगा लेते हैं

अच्छा अच्छा कोई बात नहीं मैं ही नाश्ता बना लेती हूं इतना कहकर सिला किचन में चली जाती है तभी रमेश के पिताजी से ला से कहते हैं अरे भाग्यवान है क्या आज तो अपने बहुत से बना नाश्ता खाना चाहते थे सेला अपने रुक देखिए अजी हमारे बाहो बहुत टाइम से अमेरिका में रहती आई है इसीलिए घर के खाना घर का काम करने की आदत नहीं है और वैसे भी इस घर का सारा काम में तो करते आई हूं आगे भी कर लूंगी मेरी बहू खुश रहे बस मुझे और कुछ नहीं चाहिए वाह मान गए तुम्हें सास हो तो तुम्हारी जैसी अच्छा ना अब जल्दी से नाश्ता 10 बड़ी भूख लगी है हां हां अभी देती हूं जी इस तरह कुछ दिन बीत जाते हैं

1 दिन सुबह-सुबह शीला अपनी बहू को बेटे को उठाने के लिए उनके कमरे में जाती है अरे उठो सुबह हो गई बाबू फटाफट नहा धोकर तैयार हो जा हमें मंदिर जाना है अपनी सास की बात सुनकर चांदनी अपनी सास से कहती है है रे माझी आज तो संडे है इतनी सुबह सुबह मैं कहीं नहीं जाने वाली हूं मैं तो अपने कमरे में आराम करूंगी आपको जाना है तो आप चले जाइए तभी रमेश कहता है अरे चांदनी तुम्हें मां के साथ मंदिर चले जाना चाहिए देखिए जी मुझे क्या करना है और क्या नहीं आप मुझे नहीं बताया करिए मैं इन फिजूल की चीजें में वक्त बर्बाद नहीं करते अब आप जाइए माजी मुझे आराम करना है तभी शीला कहती है अरे रमेश बेटा बहू नहीं जाना चाहती है तो कोई बात नहीं क्यों उससे जोरदार रहे हो अच्छा ठीक है तुम दोनों आराम करो मैं मंदिर होकर आती हूं और हां तुम दोनों के लिए चाय नाश्ता किचन में रखा है

इतना कहकर शीला मंदिर जाने के लिए जाती है कुछ दिनों के बाद माहौल के सभी औरतें शीला के घर में उसके बहू को देखने के लिए आती है अरे शीला हम सब औरतें तेरे बाहों से मिलने आए हैं जरा अपने बहू को तो बुलाओ शीला बहू को आवाज देती है और तभी कमरे से चांदनी निकाल आती है अरे बहू कैसी हो क्या नाम है तुम्हारा जी चांदनी बड़ा अच्छा नाम है अच्छा कहां तक पढ़ी हो जी मैं ग्रेजुएट हूं अच्छे हो खाने में क्या-क्या बना लेती हो इस तरह और तो कुछ सवाल सुनकर चांदनी को बड़ा गुस्सा आता है और वह चिड़कर उन सभी से कहती है अरे आप लोग क्या मेरा इंटरव्यू लेने आई हो आप लोग मुझे नौकरी देने वाली है जो इस तरह के बेकार सवाल मुझसे पूछ रही है कितना पढ़ी लिखी हो नाम क्या है खाना बना लेती हो कि नहीं आप लोगों को कोई और काम नहीं है मामा जी मां जी आप लोगों से बात करिए मैं चली अपने कमरे में चांदनी नाराज हो कर चली जाती है उसके जाते ही मां जी कहती हैं अरे शीला तेरी बहुत बड़ी नक्सली है

4 दिन मेरी काम में रहकर क्या आई है इसकी तो पर ही निकल आए हैं इससे तो लोगों से तमीज से बात करना भी नहीं आता हां मालती बहन एक बार बात तो तुमने सही कही है भला हमारी बहू की तो इतनी मत है वह इस तरह जवाब दें सच में शीला भगवान जाने आगे तेरा क्या होगा इसकी चिंता तुम लोग मत करो जो होगा अच्छा ही होगा अरे मेरी बहू इतने सालों से अमेरिका में रहती आई है इसलिए इन सब चीजों का आदत नहीं है धीरे सब सीख जाएगी और वैसे भी जैसी है मेरी बहू है और मुझे अपने बहुत से कोई तकलीफ नहीं है विमला सोफे से उठते हुए कहती है जैसी तुम्हारी मर्जी अच्छा अब हम लोगों को चलना चलो बहनों इतना कहकर विमला बाकी औरतों को लेकर चली जाती है उनके जाते ही हूं बड़ी आई बहू की बुराई करने ऐसी औरतों को खूब जानती हूं ऐ मेरे बहुत से मिलने नहीं बल्कि हम साथ बहू के बीच में आग लगाने आई थी इस तरह शीला कि अपने बाबू के प्रति प्रेम दिन पर दिन बढ़ता ही चला जाता है

फिर एक दिन कैसी है पारुल बड़े दिनों के बाद मेरी याद आई अरे ऐसी कोई बात नहीं है तुझे बताने के लिए फोन किया है कि अपने शहर में फैशन डिजाइनर के इंस्टिट्यूट खोला है मैं उस में एडमिशन ले ले रही हूं तू भी मेरे साथ एडमिशन ले ले अरे बा फैशन डिजाइनर का कोर्स तो मैं कब से करना चाहती थी तुमने तो बड़ी अच्छी खबर दी है मैं आज ही इस बारे में अपने पति से बात करके तुझे बताती हूं चल फोन रखती हूं बाय अगले दिन सुनिए जी हमारे शहर में फैशन डिजाइनर का एक बहुत बड़ा इंस्टिट्यूट खुला है

मुझे वहां एडमिशन लेना है ऑफिस का इंतजाम कर दीजिए ना हरे तुम तो अच्छी तरह जानती हो कि हम अभी अभी इंडिया में शिफ्ट हुए हैं सारे खर्चे तुम्हारे सामने हुए सामने अभी मेरे पास बिल्कुल पैसे नहीं है हां कुछ महीने के बाद में जरूर इंतजाम कर दूंगा बाप रे तब तक तो बहुत देर हो जाएगी फिर तो मेरा ही साल पूरा बर्बाद हो जाएगा मुझे अगले साल में एडमिशन लेना पड़ेगा पैसे का काम तो पैसा ही करता है जो अभी हमारे पास है नहीं खैर कोई बात नहीं अभी मैं ऑफिस जा रहा हूं शाम को तुम्हें घुमाने ले जाऊंगा तुम्हारा मूड भी फ्रेश हो जाएगा अपना बैग लेकर रमेश ऑफिस के लिए निकल जाता है

हेलो पिताजी मुझे कुछ पैसों की सख्त जरूरत है कि आप मुझे कल पैसे भेज सकते हैं अरे बेटा तू तो अच्छी तरह जानती है कि हम खेती-बाड़ी कर ले लोग हैं पिछले महीने तेरी मां की दवाई में बहुत पैसे खर्च हुए दो-तीन महीने के बाद है तुम्हें पैसे भेज दूंगी हां बेटा चांदनी समझ जाती है उसके पिताजी के पास अभी पैसे नहीं है फोन रख देती है इस तरह एडमिशन ले पाने के कारण चांदनी उदास होने लगती है कुछ दिन भी जाते हैं फिर एक सुबह अरे बहू जरा यहां तो आना चांदनी कमरे से बाहर आते हैं जी कहिए माजी कुछ काम है क्या बताइए मैं कर दूंगी हां हां बहुत जरूरी काम है

जरा मेरा एक फॉर्म तो भर दे जाने अपने साथ के हाथ से सोम लेती है उसे देखकर चेहरा खुशी से खिल उठा है अरे माझी अरे तो फैशन डिजाइनर इंस्टीट्यूट का एडमिशन फॉर्म है एडमिशन लेना चाहते थे ना होने के कारण मैं नहीं ले पाए आप मेरे लिए लेकर आए हैं हां बहू और इतना ही नहीं मैंने तो एडमिशन भी कर दिया है सारे पैसे जमा कर दिए हैं बस एक फॉर्म भर दे अपने सास को उदारता देखकर चांदनी को आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह सांस की गले लग जाती है मेरे होते हुए तुझे किसी चीज का चिंतन करने की जरूरत नहीं है मैं तेरे पास नहीं हूं पगली

एक कविता हर मां के लिए: घुटनों से रेंगते रेंगते,कब पैरों पर खड़ा हुआ,तेरी ममता की छांव में,जाने कब बड़ा हुआ,काला टीका दूध मलाई,आज भी सब कुछ वैसा है/ मैं ही मैं हूं मैं हूं हर जगह,प्यार ये तेरा कैसा है,सीधा साधा भोला भाला,मैं ही सबसे अच्छा हूं,कितना भी हो जाऊं बड़ा,”मां” मैं आज भी तेरा बच्चा हूं/

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