चंद्र ग्रहण ‘ ब्लड मून ‘ ( Lunar eclipse ‘ Blood moon ‘ )के बारे में

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चंद्र ग्रहण ‘ ब्लड मून ‘ ( Lunar eclipse ‘ Blood moon ‘ ) के बारे में 

 संदर्भ :

दक्षिण अमेरिका , अधिकांश उत्तरी अमेरिका और यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में 16 मई 2022-23 को , पूर्ण चंद्र ग्रहण ‘ ( Total Lunar Eclipse ) दिखाई देगा ।

  •  यह 30 अप्रैल / 1 मई को दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में देखे गए आंशिक सूर्य ग्रहण के बाद इस वर्ष का दूसरा ग्रहण ( Eclipse ) होगा ।
  •  इस दौरान , वर्ष 2022-23 का पहला ‘ ब्लड मून ‘ ( Blood Moon ) भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा ।

✓ ‘ चंद्र ग्रहण ‘ के बारे में : –

  •  पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान , चंद्रमा का रंग आमतौर पर गहरे लाल रंग में बदल जाता है , क्योंकि इस घटना के दौरान पृथ्वी , सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है , और चंद्रमा पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश के कुछ भाग को अवरुद्ध कर देती है , और जब यह

सौर – प्रकाश , पृथ्वी के वातावरण से होकर कर गुजरता है तथा अपवर्तन द्वारा चंद्रमा की मुड़ जाता है तो चंद्रमा का रंग गहरा लाल प्रतीत होता है ।

  •  जब चंद्रमा , सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में तथा सूर्य और चंद्रमा , पृथ्वी के बिल्कुल विपरीत दिशा में होते हैं , तब ‘ पूर्ण चंद्र ग्रहण ‘ होता है ।

✓ ‘ ब्लड मून ‘ के बारे में :

चंद्रमा का रंग लाल दिखने का कारण , सौर- प्रकाश द्वारा पृथ्वी के वायुमंडल के माध्यम से गुजरने का तरीका होता है । सौर प्रकाश कई रंगों से बना होता है और इन सभी की तरंग दैर्ध्य अलग – अलग होती है ।

  •  ये प्रकाश जिस तरह से हमारे वायुमंडल में यात्रा करता हैं , उसके आधार पर हमें अलग – अलग रंग दिखाई देते हैं । इसी वजह से ही , सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य और आकाश के अलग – अलग रंग दिखाई पड़ते हैं ।
  •  नीले और बैगनी रंगों की तरंगदैर्घ्य कम होती है और हमारे वायुमंडल में इनके प्रकीर्णन से आकाश का रंग नीला दिकाई देता है । लाल और नारंगी रंग की तरंग दैर्ध्य सबसे अधिक होती है , और पृथ्वी के चारों ओर मुड़ने या अपवर्तित होने से पहले , ये प्रकाशकण हमारे वायुमंडल से होकर गुजरते है और चंद्रमा की सतह से टकराते है , जिससे चंद्रमा का रंग लाल प्रतीत होता है ।

✓’ सुपरमून ‘ क्या है ?

जिस समय चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होता है , और साथ ही अपने पूर्ण आकार में होता है , तब इस स्थिति को ‘ सुपर मून ‘ ( Supermoon ) कहा जाता है ।

  •  पृथ्वी के सर्वाधिक नजदीक होने की वजह से , इस स्थिति में चंद्रमा अपने सामान्य आकार से अधिक बड़ा दिखाई देता है ।
  •  किसी एक विशिष्ट वर्ष में , लगातार दो से चार पूर्ण सुपरमून ( Full Supermoons ) तथा दो से चार नए सुपरमून ( New Supermoons ) की घटनाएँ हो सकती हैं ।

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