भारत के प्रमुख संविधान संशोधन अधिनियम 18 से 41 तक part – 2

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भारत के प्रमुख संविधान संशोधन अधिनियम 18 से 41 तक Part – 2 

अठ्ठारहवां संविधान संशोधन अधिनियम:- 1966 पंजाब का पुनर्गठन किया तथा हरियाणा नामक नया राज्य बनाया गया। यह प्रावधान किया गया कि ‘ राज्य शब्द में संघ शासित प्रदेश भी सम्मिलत होंगे।

उन्नीसवां संविधान संशोधन अधिनियम :-1966 यह व्यवस्था की गई की ससंद तथा विधानमंडलों के चुनावों से संबंधित विवादों की सुनवाई निर्वाचन आयोग के न्यायालय में होगी। इस संशोधन द्वारा निर्वाचन आयोग के कर्तव्यो को स्पष्ट किया गया।

इक्कीसवा संविधान संशोधन अधिनियम:- 1967 सिंधी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।

बाईसवां संविधान संशोधन अधिनियम:– 1969 असम राज्य के अंतर्गत ‘मेघालय‘ का सृजन किया गया ।

छब्बीसवां संविधान संशोधन अधिनियम:- 1971 भूतपूर्व रियासतों के शासकों के ‘प्रिवीपर्स‘ को समाप्त कर दिया गया।

इक्तीसवां संविधान संशोधन अधिनियम:- 1973 लोकसभा में निर्वाचित सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गई।

चौंतीसवा संविधान संशोधन अधिनियम:- 1974 विभिन्न राज्यों द्वारा पारित किए गए 20 भूमि सुधार कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में सम्मिलत करके उन्हें संरक्षण प्रदान किया गया।

पैंतीसवा संविधान संशोधन अधिनियम:- 1974 सिक्किम को सह-संयुक्त राज्य का दर्जा दिया गया। संवधिान में दसवीं अनुसूची को शामिल किया गया।

छत्तीसवां संविधान संशोधन अधिनियम:- 1975 सिक्किम को भारतीय संघ के 22वें राज्य के रूप में मान्यता प्रदान की गई।

उनतालीसवा संविधान संशोधन:- अधिनियम, 1975 राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्ययक्ष के निर्वाचन को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर कर दिया गया।

इक्तालीसवा संविधान संशोधन अधिनियम:-1976 राज्य के लोकसेवा आयोगों के सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 वर्ष तथा संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष निश्चित की गई।

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