शिक्षा प्रणाली में भारतीय संस्कृति और संस्कृत ज्ञान परंपरा की अनि‍वार्यता

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शिक्षा प्रणाली में भारतीय ज्ञान परंपरा की अनि‍वार्यता

देश की पहचान को कायम रखने के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना आवश्यक है। प्रतीकात्मक

विद्यालयी पाठयक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का ज्ञान अपरिहार्य है। संस्कृत से ही संस्कारवान समाज का निर्माण होता है। इसका महत्व समझते हुए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान इस उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है

प्रो. सरोज शर्मा। भारत, संस्कृति और संस्कृत, ये तीनों शब्द मात्र शब्द नहीं, अपितु प्रत्येक भारतीय के भाव हैं। भारतीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा का ज्ञान परम आवश्यक है। अतएव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2023 में भी बहुभाषावाद को प्रासंगिक बताते हुए शिक्षा क्षेत्र के सभी स्तरों पर संस्कृत को जीवन जीने की मुख्यधारा में शामिल कर अपनाने पर बल दिया गया है। अत: संस्कृत का अध्ययन कर छात्र-छात्राएं न केवल अपने-अपने अतीत से गौरवान्वित होकर वर्तमान में संतुलित व्यवहार की ओर अग्रसर होंगे, अपितु भविष्य के प्रति भी उल्लासित होंगे।

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